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कविता

क्रूर संगीत
आरती


घेरे हुए... वृत्ताकार...
बज रहा है... क्रूर संगीत...
भाग नहीं रही... हथेलियों से दबाया भी नहीं कानों को
सुन रही इत्मिनान से
ठिठुरते पहाड़ का एक चित्र मेरे सामने पड़ा है


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हिंदी समय में आरती की रचनाएँ