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कविता

पवन खींचे अँचरा
श्रीकृष्ण तिवारी


गते-गते उगेले चनरमा हो रामा
पवन खींचे अँचरा

दूर बहे नदिया पियासलि अँखिया
हाँफि-हाँफि उड़े मन खोलि दूनो पँखिया
पलक-अँजुरि भरि मोतिया हो रामा
सपन देला पहरा

निबिया के गँछिया प पसरे चँ‍दनिया
सूई अस चुभे अँग-अँग में किरिनिया
लि‍लरा प चमके बिजुरिया हो रामा
मथवा प बदरा

झुरु-झुरू बहे अन्‍हुआइलि ब‍यरिया
चिहुँकि-चिहुँकि उठि बोले कोइलरिया
सून लगे अँगना दुअरिया हो रामा
टूटि गइले असरा 


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