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कविता

नमक की अहमियत
उर्मिला शुक्ल


हम हैं कौन
रहते हैं कैसे
हमारी हँसी खुशी
हमारे नाच गाने
रीति नीति पर
बोलते हो तुम मगर
नहीं जानते तुम हमें
हमारे मन और
हमारे जीवन को
सिर्फ मुर्गा लड़ाना
सल्फी पीना और
सरहुल तक ही
सिमटा नहीं है
हमारा जीवन
कितना मुश्किल है
भोजन की टोह में
दिन दिन भर भटकना
बचना अपने आप को
जंगल में घुस आए
दोपायों से
कुछ भी तो नहीं जानते तुम
पर लिखते हो
बहुत कुछ कि
कितने मूर्ख हैं हम कि
नमक के बदले में
दे देते हैं चिरौंजियाँ
तुम नहीं जानते
जंगल का अर्थ
नहीं जानते तुम
नमक की अहमियत


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