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कविता

ख खेलें
लाल्टू


खराब ख
ख खुले
खेले राजा
खाएँ खाजा.

खराब ख
की खटिया खड़ी
खिटपिट हर ओर
खड़िया की चाक
खेमे रही बाँट.

खैर खैर
दिन खैर
शब खैर.

(पश्यन्ती - 2003)


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हिंदी समय में लाल्टू की रचनाएँ