hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

प्रेम
लाल्टू


समन्दर वह
समन्दर में वह
समन्दर समन्दर.

लहरों में उसने उसे जीवन सा थामा.

वह परीकथाओं से आया राजपक्षी
उसकी आँखों में उसका प्राण.
वह उसकी नन्ही कपोती
उसकी धड़कनों में उसकी धड़कनें
उसने उसको किया जीवन रोग से संक्रमित.

उसकी आँखों में उसकी रातों का हर चाँद बसा
उसकी रातों का अँधेरा उसकी आँखों में घुला.

वह तभी बरसे वह जब कहे
जब तक वह कहे वह स्थिर बहे
वह बहे
वह भी बहे
वह, वह उसका वह, वह जिए.

(पश्यन्ती - 2004)


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में लाल्टू की रचनाएँ