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कविता

आशा की किरणें
देवमणि पांडेय


आँखों में अपनी हैं आशा की किरणें
चाहत के सुर धड़कनों में सजाएँ
इक दिन मिलेगी वो सपनों की दुनिया
जादू उमंगों का दिल में जगाएँ

बादल में बिजली है, सूरज में आभा
हिम्मत हवाओं में सागर में लहरें
मुश्किल नहीं कुछ अगर जिद है मन में
चलतें रहें बस कहीं भी ना ठहरें
नजरों में झिलमिल सितारे सजाकर
नई रोशनी से गगन जगमगाएँ

ये हम कौन हैं ! क्या है हसरत हमारी
लाजिम है खु़द को भी पहचान लें हम
अगर हौसला है रगों में हमारी
तो मंजिल पे पहुँचेंगे, ये जान लें हम
कड़ी धूप हो, पर न पीछे हटेंगें
ये एहसास हम रास्तों को दिलाएँ


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