hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

नेह-नदी
कमलेश द्विवेदी


मैं हूँ एक किनारा तू भी एक किनारा है।
हमको जोड़े नेह-नदी की पावन धारा है।

हम दिन-दिन भर रात-रात भर
साथ-साथ रहते।
नेह-नदी की धारा के सँग
साथ-साथ बहते।
फिर भी अचल दिखाई देता रूप हमारा है।
हमको जोड़े नेह-नदी की पावन धारा है।

वैसे तो पुल से भी अपने
हैं रिश्ते-नाते।
मगर नेह के नाते उससे
कितने जुड़ पाते।
ऐसे में इक बड़ा सहारा नेह तुम्हारा है।

इक-दूजे का साथ हमेशा
हमें निभाना है।
नेह-नदी को नेह-सिंधु तक
लेकर जाना है।|
इसके लिए समर्पित अपना जीवन सारा है।


End Text   End Text    End Text