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कविता

बेकली
विनय मिश्र


ऐसी बातों में यूँ कुछ
रक्खा नहीं है
मगर जो भी हुआ
वो अच्छा नहीं है।

सड़क बननी थी जहाँ
कोई गली है
सबकी आँखों में अजब-सी
बेकली है
ठीक है आँसू कोई
बहता नहीं है।

रोशनी देती धुआँ
अपना उड़ाती
एक चिनगी है हवा में
चमचमाती
मन दहकता है अभी
ठंडा नहीं है।

जानते हैं सब
कोई कहता नहीं है
कोई भी ईमान का
पक्का नहीं है
जान का सौदा कोई
सस्ता नहीं है।


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