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कविता

खुशियों से आँगन महके
रास बिहारी पांडेय


खुशियों से आँगन महके
हर कोई गीत गाने लगा
बच्चे का जन्म क्या हुआ
घर भर तुतलाने लगा।

कोई चाँद लाए कोई तोड़ता है तारा
खुशियों के सागर का ना कोई किनारा
हिचकी भूले से आए उसे
तो घर भर हकलाने लगा।

जन्म के ही साथ जुड़ गए कितने रिश्ते
दादा नाना मामा बुआ मौसी मौसे
कोमल कपोलों को चूमकर
हर कोई रिश्ता जतलाने लगा।

छूटी ठाकुरपूजा छूटी ठकुरानी
लोरी की धुन ही लागे अमृतबानी
भाँति-भाँति के लिए खिलौने
हर कोई रिझाने लगा। 


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