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कविता

नाम को अर्थ भी मिल गया
रास बिहारी पांडेय


नाम को अर्थ भी मिल गया
जिंदगी, जिंदगी हो गई
हमसफर जबसे तू हो गया
धूप भी चाँदनी हो गई।

क्या बताऊँ तेरे रूप में
कौन सा एक रतन मिल गया
चाह थी पंखुड़ी की जिसे
उसको पूरा सुमन मिल गया
अब तो सावन से दिन हो गए
फाग सी यामिनी हो गई।

प्यार की राह में जो मिटे
ऐसे जग में अनंत हो गए
प्यार जिनको न मन का मिला
वे ही ऋषि मुनि औ संत हो गए
प्यार बिन जिंदगी जो मिली
दर्द की रागिनी हो गई।


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