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कविता

खुशहाल है
इसाक ‘अश्क’


पोस्टर विज्ञापनों में
देश मेरा, बंधु मेरे
फिक्र मत करना
           बड़ा खुशहाल है।

हर समस्या
फाइलों में कैद -
           फीतों से बँधी है
यह न कहना
सिर्फ यह तो -
           भ्रष्ट लोगों की सदी है

नृत्य को तैयार
हर क्षण, हर समय
भूखा दिगंबर
           कोरकू संथाल है।

धर्म-दंगों की
फसल जमकर -
           उगाने में लगे हैं

बाद मुद्दत के
अचानक -
           होश में आए, जगे हैं

छेड़ना मत
जिक्र करना आँसुओं का
स्वार्थ में डूबे स्वजन
          दिक्-काल है।


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