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कविता

जो किरनों से मैंने पता उनका पूछा
अलका विजय


जो किरनों से मैंने पता उनका पूछा,
चलाते रहे रात सारी वो हमको।
है क्‍या माजरा, है क्‍या बात ऐसी,
जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों।

क्‍यों धरती है ओढ़े निराशा की चादर,
कहाँ छुप गए आज नभ में ये बादल।
है किसने चुराया है आँखों का काजल,
जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों।

है देखे कोई चाँद में रूप उनका,
है जलता बदन चाँदनी में किसी का।
है किस बात पर चाँदनी आज गुमसुम,
जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों।

है अलसाई सी क्‍यों हवा आज डोले,
है बोली बिरह की पपीहा भी बोले।
है चंदा के आँगन में कैसी खामोशी,
जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों।

मना लो उसे जा आँगन गगन के,
बिछा दो सितारों को राहों में उनकी।
क्‍यों रुनझुन-रुनझुन पायल आज बोले,
जरा पूछ लो मिल के उनसे सितारों।
 


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