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कविता

निलय के पटल पर कई चित्र तेरे
अलका विजय


निलय के पटल पर कई चित्र तेरे,
बना कर मिटाए मिटा कर बनाए
थे बिछड़े जहाँ हम उसी राह से फिर
तेरी याद आई मगर तुम न आए।

प्रणय के मेरे गीत कर राग रचकर
विभा सुंदरी भी लगी थी बहकने
मनोहर शमा ने अलख थे जगाए।
बहुत चाहा फिर भी मगर गा न पाए।
निलय के पटल पर कई चित्र तेरे...

विहग वन के आँगन में होती जो हलचल
लगा जैसे हमको किसी ने पुकारा
बढ़े थे कदम पाँव फिर लौट आए
राहें सहज थी मगर चल न पाए।
निलय के पटल पर कई चित्र तेरे...

विप्‍लव की अग्नि में जलते रहे हम
तकते रहे बूँद अमृत की बरसे
देकर दिलासा भँवर बीच लाए
न डूबी ये कश्‍ती मगर बच न पाए
निलय के पटल पर कई चित्र तेरे...

मेरे मन के मंदिर की तुम देव प्रतिमा
सुंदर सुवासित सुमन से सजाया
दिया साधना का स्वयं का बनाया
जला कर बुझाए बुझा कर जलाए
निलय के पटल पर कई चित्र तेरे...

तेरी याद आई छलक आए आँसू
उन्‍हीं में रही डूबती और उभरती
करूँ क्‍या जतन, अब कोई ये बताए
भरे आँख अश्‍कों को भी पी न पाए
निलय के पटल पर कई चित्र तेरे...
 


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