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कविता

खोने के लिए बाध्य, जीतने के लिए विवश
बॉब डिलन

अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय


अरे वाह! मैं खोने के लिए बाध्य हूँ, जीतने के लिए विवश हूँ मैं
सड़क पर पुनः चलने के लिए विवश हूँ मैं
खोने के लिए बाध्य हूँ, मैं जीतने के लिए विवश हूँ
सड़क पर पुनः चलने के लिए विवश हूँ मैं।

अरे वाह! मैं सिर्फ उन घुमक्कड़ों में से एक हूँ
जो घूम रहे हैं पता नहीं कब से
यहाँ मैं आ गया और फिर से चला गया

तुमने समझा मुझे कोई छोर नहीं मिला।
मैं खोने के लिए बाध्य हूँ, जीतने के लिए विवश हूँ मैं
सड़क पर पुनः चलने के लिए विवश हूँ मैं
मैं खोने के लिए बाध्य हूँ, जीतने के लिए विवश हूँ मैं
सड़क पर पुनः चलने के लिए विवश हूँ मैं।

 


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