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कविता

पर हूँ
प्रेमशंकर शुक्ल


अंतर्विरोधों का
घर हूँ

पर हूँ
सींचता हुआ
जीवन को ही
 


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हिंदी समय में प्रेमशंकर शुक्ल की रचनाएँ