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कविता

सेठानी घाट पर
प्रेमशंकर शुक्ल


सेठानी घाट पर
आज नर्मदा से
मिलने आया
जुड़ा गई आँखें

निहारते नर्मदा का निर्मल जल
बह गया भीतर का कूड़ा-करकट
बहुत संबल मिला
नर्मदा के दरस-परस से
 


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