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कविता

एलबम
प्रेमशंकर शुक्ल


बहुत-सी तस्वीरें समेटे
एक एलबम हूँ

इतने सारे दृश्यों से जड़ा
भरा हुआ इतनी छवियों से

यह टूटी हुई-बिखरी हुई
किसकी छवि है
ये लकीरें किन मर्मों तक पहुँच हैं

क्यों हूँ ऐसा
कि न पूरा कह पाता हूँ
न रह जाता हूँ
                        चुप ही
 


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