hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

बाल साहित्य

पापा जी की प्यारी बिटिया
मनोज कुमार गुप्ता


चाचू, मुझको टिफिन मँगा दो
बैग और कपड़ा सिलवा दो।
मास्टर जी से नहीं डरेंगे
उनसे हम सब खूब पढ़ेंगे।

दीदी के संग हम भी, अब तो
रोज सवेरे जाएँगे।
पापा जी की प्यारी बिटिया
हम भी अब बन जाएँगे।

खूब लिखेंगे, खूब पढ़ेंगे
कभी किसी से नहीं डरेंगे।
 


End Text   End Text    End Text