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कविता

राजा रोता बहुत है
सोनी पांडेय


रोता है बात बे बात
कहाँ से आई इतनी भावुकता
कि राजा तनता नहीं उस जगह
जहाँ उतरती है जनता बेखौफ
ये रोना दबाने का हुनर है
विद्रोह की आवाज
उसे याद आती है माँ...
और तुम्हें पुचकारते हुए
कहता है
खोया है एक माँ ने अपना बेटा
रोहित तुम जानते हो
ये राजा चतुर है
इस लिए रोता बहुत है...
 


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