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कविता

इन दिनों
सोनी पांडेय


इन दिनों थम कर जलती है आग चूल्हे में
अब वो सीख गई है थम कर जलना
कि जरूरी है जलते रहना
भभक कर जलते हुए एक दम से बुझ जाना
निरा मूढ़ता है
पकाना है बहुत कुछ सिर पर चढ़ी पतीली में
रह-रह कर भूख उबलती है
आग का बचे रहना भूख की अनिवार्यता है
चूल्हे का अस्तित्व आग पर निर्भर है
इस लिए आग का थम कर जलना
बचाए रखना आग
चलो जलते हैं थम कर पकाते हुए जीवन
कि जरूरी है जलना आग का...
 


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