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कविता

कोई और वजह रही होगी
अविनाश मिश्र


कोई सिर्फ बीस रुपए के लिए कत्ल क्यों करेगा
कोई क्यों प्रेम को प्रमाणित करने के लिए
प्रेमिका के आकर्षक चेहरे पर तेजाब फेंकेगा
कोई क्यों केवल रैगिंग के कारण कलाई की नस काट लेगा
कोई क्यों परीक्षा में कम अंक आने पर सल्फास खाकर जान दे देगा
एक लाख का कर्ज है महज इसलिए कोई आत्महत्या क्यों करेगा
‘जन्नत में बहत्तर हूरें मिलती हैं सहवास के लिए’
इस इनाम के लिए कोई धरती पर बम धमाके क्यों करेगा
 
समझदारियाँ इतनी खोखली और बुराइयाँ इतनी सामान्य क्यों हैं आजकल
जबकि महानुभाव सब कुछ हिंदी में समझाते आए हैं

कोई कुछ बदलने के लिए मतदान
और कोई कुछ बदलने के लिए जनसंहार क्यों करेगा
 
कुछ गलतफहमियाँ हैं आइए उन्हें दूर कर लें
जीवन में बेवकूफियों के ये बेरोक सिलसिले इससे शायद कुछ थम जाएँ
 


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हिंदी समय में अविनाश मिश्र की रचनाएँ