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कविता

मजार
भारती सिंह


किस अनाम शख्स का था वहाँ
एक छोटा सा मजार
आस-पास नहीं था किसी का साथ
वह सो रहा था वर्षों से वहाँ
बोलता नहीं कुछ
पर शायद मैंने सुना था कुछ
कुछ राज दफ्न हैं वहाँ
या फिर कोई इतिहास कैद है वहाँ
सोचना ये महज नहीं इत्तिफाक है
गुजारा है कई वर्ष पास उसके
अपनी व्यस्तताओं के बीच भी
खींच लाता अपनी तरफ
उफ!
उसकी मौजूदगी वहाँ
क्या बतलाओगे कभी
इतने प्रबुद्ध लोगों के बीच
बिना किसी सवाल जवाब के
तुम कैसे रहे चुप्प !!
 


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