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कविता

तुम ने कुछ नहीं कहा
ओम नागर


तुम ने कहा - हवा
मैं हो गया - बादल

तुम ने कहा - धरती
मैं हो गया - आकाश

तुम ने कहा - नदी
मैं हो गया - समंदर

तुम ने कहा - आग
मैं हो गया - पानी

तुम ने कहा - देह
मैं हो गया - साँस

तुम ने कहा - आँख
मैं हो गया - रोशनी

तुम ने कहा - छाँव
मैं हो गया - पेड़

तुम ने कहा - प्यास
मैं हो गया - जल

तुम ने कहा - स्वाद
मैं हो गया - नमक

तुम ने कहा - नींद
मैं हो गया - सपना

तुम ने कहा - रेखाएँ
मैं हो गया - हथेली

तुम ने कहा - पैर
मैं हो गया - रास्ता

तुम ने कहा - कीचड़
मैं हो गया - कमल

तुम ने कहा - ईश्वर
मैं हो गया - अर्चन

तुम ने कहा - फल
मैं हो गया - दुआ

तुम ने कहा - अँगुलियाँ
मैं हो गया- मुट्ठी

तुम ने कहा - कान
मैं हो गया - प्रेम गीत

तुम ने कहा - डोर
मैं हो गया - पतंग

तुम ने कहा - काजल
मैं हो गया - पलक

तुम ने कहा - नाक
मैं हो गया - खुशबू

तुम ने कहा - कली
मैं हो गया - भँवरा

तुम ने कहा - अँधेरा
मैं हो गया - दीपक

तुम ने कहा - लोहा
मैं हो गया - पारस

तुम ने कहा - ओस
मैं हो गया - धूप

तुम ने कहा - शब्द
मैं हो गया - कागद

तुम ने कहा - छुअन
मैं हो गया - मोरपंख

तुम ने कहा - होंठ
मैं हो गया - गुलाब

तुम ने कहा - प्रेम
मैं हो गया - हृदय

तुम ने कहा - भूख
मैं हो गया - रोटी

तुम ने कहा - शिराएँ
मैं हो गया - रक्त

तुम ने कहा - चाँदनी
मैं हो गया - चाँद

तुम ने कहा - दिन
मैं हो गया - सूरज

तुम ने कहा - अभिधा
मैं हो गया - व्यंजना

तुम ने कहा - भाषा
मैं हो गया - मौन

तुम ने कहा - मनुष्य
मैं हो गया - कवि

तुम ने कहा - जीवन
मैं हो गया - कविता

तुम ने कुछ न कहा
मैं हो गया - तुम्हारा।
 


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हिंदी समय में ओम नागर की रचनाएँ