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कविता

स्वर्ग के बच्चे
घनश्याम कुमार देवांश


(झाम्ट्से गटसल चिल्ड्रेन्स कम्यूनिटी, लुमला, तवांग के बच्चों के लिए)

स्वर्ग के बच्चे पैदा नहीं होते
इसलिए वे जिंदा रहते हैं हमेशा
सृष्टि के हिमशिखरों पर
वे कहीं नहीं जाते इसलिए उन्हें कभी
वापस नहीं लौटना होता
वे सूरज की तरह अचल और प्रकाशमान हैं
स्वर्ग के बच्चे हर कष्ट को
अपने जादुई स्पर्श से खुशी में बदल देते हैं
मुझे भरोसा है कि एक दिन वे
अपने जादुई लिबासों में
इस धरती पर उतरेंगें
और धरती के सारे कष्ट हर लेंगें
 


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