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कविता

जादुई घोड़ा और जिराफ
घनश्याम कुमार देवांश


एक हरा भरा पहाड़ी रास्ता
आकर खत्म हुआ तुमपर
एक पूरा झरना तुम्हारी देह में घुल गया
इस तरह पहाड़ों, नदियों, वृक्षों,
पक्षियों व बादलों से भरी पृथ्वी
और आकाश के जरिए किया तुमसे प्यार
एक खामोश उदास बेंच पर
रची सृष्टि तुम्हारे साथ
बनाया एक जादुई घोड़ा
और आकाश की पत्तियाँ चबाने वाला एक जिराफ
जेब में पाले रहस्यमयी बिल्लियों के बच्चे
और पहाड़ी याक के थनों से
छाना ढेर सा एकांत
प्रलय भरे प्रेम के साथ


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