कविता संग्रह : एक संपूर्णता के लिए (1998), एक ही चेहरा (2006), रक्तचाप और अन्य कविताएँ (2015)
आलोचना : आत्मकथा की संस्कृति (2003), निराशा में भी सामर्थ्य (2013), रघुवीर सहाय (2014, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली के लिए विनिबंध), जीने का उदात्त आशय (2015)
संस्मरण : यही तुम थे (2016, कवि वीरेन डंगवाल पर एकाग्र आलोचनात्मक संस्मरण)
संपादन : प्रतिनिधि कविताएँ : मंगलेश डबराल (2017)
अन्य : भर्तृहरि के इक्यावन श्लोकों की हिंदी अनुरचनाएँ प्रकाशित