आलोचना-समकालीन सृजन- संदर्भ (दो खंड), परिक्रमा: हिन्दी साहित्य, बेतरतीब, साहित्य का नेपथ्य अनुवाद- :पाँच दशक (साहित्य अकादमी का इतिहास), 84 चौरिंग का्रस रोड, हो चिमिन्ह की कविताएँ, हमारे युग का खलनायक: राजेंद्र यादव