कविता संग्रह-वेरा उन सपनों की कथा कहो, जब भी बसंत के फूल खिलेंगे , यह धरती हमारा ही स्वप्न है, दिखना तुम सांझ तारे को, दुख का देश और बुध्द पत्रकारिता- अखबारनामा: पत्रकारिता का साम्राज्यवादी चेहरा अनुवाद- भगतसिंह की जीवनी