गीत संग्रह : आहत हैं वन, चेहरों के अंतरीप, पंख बिखरे रेत पर, सुनो तथागत, और...हमने संधियाँ कीं, रखो खुला यह द्वार
कविता संग्रह : लौटा दो पगडंडियाँ, दी सैप इज स्टिल ग्रीन (अंग्रेजी)
काव्य नाटक : एक और कौंतेय, गाथा आहत संकल्पों की, अंगुलिमाल, कटे अँगूठे का पर्व, कहियत भिन्न न भिन्न
यात्रावृत्त : और यह यायावरी मन कीगीत संग्रह : आहत हैं वन, चेहरों के अंतरीप, पंख बिखरे रेत पर, सुनो तथागत, और...हमने संधियाँ कीं, रखो खुला यह द्वार