सम्पादन- देहरि भई विदेस(लेखिकाओं के आत्मकथांशा), काश में राष्ट्र- द्रोही होता (राजेन्द्र यादव के विचार लेख), स्त्री विमर्श: अगला दौर का सम्पादन