आलोचना : विकल्प की प्रक्रिया; आज का वैचारिक संघर्ष मार्क्सवाद; आलोचना के बहाने; समय, समाज व मनुष्य, कविता का वर्तमान, छायावादी काव्य भाषा का विवेचना, दिव्या का सौंदर्य, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : व्यक्तित्व और कृतित्व
कविता संग्रह : धार एक व्याकुल; रक्त कमल परती पर
व्यंग्य : देह धरे को दंड; ईश्वर से भेंटवार्ता