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विश्‍व धर्म सम्‍मेलन (28 फरवरी 2022), मुखपृष्ठ संपादकीय परिवार

विश्व-धर्म-महासभा

स्वामी विवेकानंद

शिकागो, ११ सितंबर, १८९३

अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों,

आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा है। संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परंपरा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी संप्रदायों एवं मतों के कोटि-कोटि हिंदुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।

मैं इस मंच पर से बोलनेवाले उन कतिपय वक्ताओं के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ, जिन्होंने प्राची के प्रतिनिधियों का उल्लेख करते समय आपको यह बतलाया है कि सुदूर देशों के ये लोग सहिष्णुता का भाव विविध देशों में प्रसारित करने के गौरव का दावा कर सकते हैं। मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ, जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति, दोनों की ही शिक्षा दी है। हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते, वरन् समस्त धर्मों को सच्चा मानकर स्वीकार करते हैं। मुझे एक ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है, जिसने इस पृथ्वी के समस्त धर्मों और देशों के उत्पीड़ितों और शरणार्थियों को आश्रय दिया है। मुझे आपको यह बतलाते हुए गर्व होता है कि हमने अपने वक्ष में यहूदियों के विशुद्धतम अवशिष्ट अंश को स्थान दिया था, जिन्होंने दक्षिण भारत आकर उसी वर्ष शरण ली थी, जिस वर्ष उनका पवित्र मंदिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया था। ऐसे धर्म का अनुयायी होने में मैं गर्व का अनुभव करता हूँ, जिसने महान जरथुष्ट्र जाति के अवशिष्ट अंश को शरण दी और जिसका पालन वह अब तक कर रहा है।...

भाइयो, मैं आप लोगों को एक स्तोत्र की कुछ पंक्तियाँ सुनाता हूँ, जिसकी आवृत्ति मैं अपने बचपन से करता रहा हूँ और जिसकी आवृत्ति प्रतिदिन लाखों मनुष्य किया करते हैं :

रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम्। नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव॥...

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वैचारिकी

मा. ठेंगड़ीजी का साहित्य : अक्षय प्रेरणास्त्रोत

दत्तोपंत ठेंगडी

माननीय दत्तोपंत ठेंगड़ीजी एक अद्भुत असामान्य विचारक-प्रचारक थे। उनका जीवन पहलू— बहुआयामी था। वर्तमान में जब तथाकथित प्रगतिशील और स्वयम् नियुक्त अभिमतकर्ता सर्वसामान्य नागरिक को गुमराह करने के लिए तुले हुए हैं और परिणामतः हिंदुत्व विचार के बारे में भिन्न-भिन्न गलतफहमियाँ फैला रहे हैं, तब दत्तोपंतजी का साहित्य अनोखा मार्गदर्शन कर सकता है। हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं ने किस पद्धति से अध्ययन चिंतन करना चाहिए, इस चिंतन का कैसा अभिव्यक्तिकरण करना चाहिए और प्राचीन सुभाषितों तथा श्लोकों की कालसुसंगत समीक्षा भी कैसी करनी चाहिए यह मार्गदर्शन ठेंगड़ीजी का साहित्य निःसंदेह कर सकता है। मैंने सोचा है कि यद्यपि मेरी अर्हता या पात्रता नहीं है, तो भी ठेंगड़ीजी ने दिए हुए भाषण और लिखे हुए लेख वर्तमान में कितने और कैसे प्रासंगिक हैं, इसी पहलू को विशद करना उचित होगा। मा. दत्तोपंत जी पूजनीय श्रीगुरु जी के मार्गदर्शन के प्रकाश में निष्ठा से चलने वाले संघ स्वयंसेवक थे। उन्होंने खुद के जीवन में ‘शिवो भूत्वा शिवं यजेत्’ यह मंत्र शतप्रतिशत चरितार्थ किया। ठेंगड़ीजी ने ‘नवदधीचि परमपूजनीय श्रीगुरु जी’ इस शीर्षकता को लेख लिखा है उसमें निम्नलिखित परिच्छेद पढ़ने को मिलता है। ‘श्रीगुरु जी का जीवन हमने देखा है। पार्थिव शरीर के नाते वे हमारे बीच में नहीं हैं। लेकिन उनका जो यह संपूर्ण जीवन है, वह हमें मार्गदर्शन कर रहा है। ऐसा अखंड परिश्रमी कोई व्यक्ति नहीं जिसने इतने लम्बे अरसे तक लगातार इतना परिश्रम किया हो। सारा कार्य करते हुए भी अहंकार को कभी भी अपने मन में नहीं आने दिया। प्रसिद्धि की कभी बालसा नहीं रखी। यह कितनी बड़ी बात है, इसका हम विचार करें। ...उन्होंने अपने मन ही मन भक्त हनुमान की तरह संकल्प किया होगा। व्यक्त हनुमान ने कहा— ‘रामकाज कीन्हें बिना अब मोहे कहाँ विश्राम?’ इसी तरह शायद श्रीगुरु जी ने कहा— ‘राष्ट्रकाज कीन्हे बिना अब मोहे कहाँ विश्राम!?’ अविश्राम परिश्रम करते-करते उन्होंने देहत्याग दिया।’ मा. दत्तोपंतजी ने लिखा हुआ यह परिच्छेद उनका खुद का ही जीवन प्रतिबिंबित करता है। जो शिष्य अपने गुरु से एकरूप होता है, वही शिवो भूत्वा शिवं यजेत्’ इस मंत्र को चरितार्थ करता है।…

वैचारिकी संग्रह
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड – 1
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 2
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 3
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 4
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 5
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 6
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 7
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 8
दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन खंड - 9

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(कुलपति)

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संपादक
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ISSN 2394-6687

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