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ओ मेरे शरीर
ओ मेरी झील
कुछ दिन और मैं
कैसे लिखूँ तुम्हारी सुंदरता
गाँव से एक दिन
चाँद की तरह
जैसे तुम हो वैसा लिखना
झील
झील और सुंदरता
तुम्हारे जीवन का स्केच
तुम्हारा गाँव और तुम
धरती नाश्ते की प्लेट है
परंपराएँ
प्रार्थना
पुल से लिपट कर रोती नदी
पहाड़ पर खड़ा होकर देखता हूँ तुम्हें
बोर कब होना चाहिए
मेरे गाँव की नदी पर पुल
मर्यादा प्रेम में नहीं बैर में होनी चाहिए
मेरा घर उम्र और दिन
मेरा सीना है पहाड़
शाम जा रही है
शाम तुम सुस्ता लो जरा
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